RBI ने घटाया रेपो रेट, NEFT और RTGS से हटाया चार्ज

RBI ने घटाया रेपो रेट, NEFT और RTGS से हटाया चार्ज

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को 2019-20 की दूसरी द्वैमासिक मौद्रिक नीतिगत समीक्षा की घोषणा की है। आरबीआई ने आर्थिक वृद्धि दर में नरमी के बीच अपनी मुख्य नीतिगत ब्याज दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की कटौती की और साथ ही आगे के लिए नीतिगत रुख को ‘तटस्थ’ से ‘नरम’ कर दिया। इस साल यह लगातार तीसरा मौका है जब केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए सस्ता धन सुलभ कराने के लिए अपनी नीतिगत दर में कटौती की गयी है। इन तीनों मौकों को मिला कर रेपो दर में कुल 0.75 प्रतिशत की कटौती हो चुकी है।

इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने आरटीजीएस (RTGS) और एनईएफटी (NEFT) से चार्जेस हटा दिए हैं। मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में बड़े फंड ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल होने वाले रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम यानी आरटीजीएस और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर यानी एनईएफटी के लिए चार्ज हटा दिए हैं। आरबीआई के इस फैसले के बाद बैंक भी अपने ग्राहकों के लिए चार्ज कम कर सकते हैं। अभी तक आरबीआई आरटीजीएस और एनईएफटी पर चार्ज वसूलता था। ज्यादातर सभी बड़े बैंक 2 लाख रुपए से 5 लाख रुपए तक के आरटीजीएस फंड ट्रांसफर के लिए 25 रुपए और टाइम वैरिंग चार्ज लेते हैं। वहीं 5 लाख रुपए से अधिक के लिए ये बैंक 50 रुपए और टाइम वैरिंग चार्ज वसूलते हैं।

रिजर्व बैंक ने घरेलू गतिविधियों में नरमी तथा वैश्विक स्तर पर व्यापार युद्ध बढ़ने के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के लिये आर्थिक वृद्धि दर अनुमान को कम कर 7 प्रतिशत कर दिया। इससे पहले, अप्रैल में मौद्रिक नीति समिति ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 2019-20 में 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। इसमें पहली छमाही में वृद्धि 6.8 से 7.1 तथा दूसरी छमाही में 7.3 से 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था। इसमें जोखिम दोनों तरफ समान रूप से बराबर है।

केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 की जनवरी-मार्च तिमाही के आंकड़े से संकेत मिलता है कि घरेलू निवेश कमजोर है और कुल मिलाकर मांग कमजोर हुई है। निर्यात में नरमी इसका एक बड़ा कारण है। वैश्विक स्तर पर मांग की कमजोरी का कारण व्यापार युद्ध का बढ़ना है। इससे भारत के निर्यात और निवेश पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा हाल के महीनों में खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में निजी खपत कमजोर हुई है।

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही के लिये मुद्रास्फीति के अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर 3 से 3.1 प्रतिशत कर दिया है। यह सरकार द्वारा निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में है। मौद्रिक नीति घोषणा में कहा गया है, ‘‘मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) इस बात पर गौर करती है कि आर्थिक वृद्धि दर उल्लेखनीय रूप से कमजोर पड़ी है...निवेश गतिविधियों में तीव्र गिरावट के साथ निजी खपत वृद्धि में नरमी चिंता की बात है।’’ रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा 5 से 7 अगस्त 2019 को की जाएगी।