इस गांव में दफनाने को नहीं दो गज़ ज़मीन, घर बन रहे क़ब्रिस्तान

इस गांव में दफनाने को नहीं दो गज़ ज़मीन, घर बन रहे क़ब्रिस्तान

आगरा : किसी ने सच ही कहा है, 'न खाने के लिए भोजन मिल रहा है और मरने के लिए जमीन', ये एक पुराना कथन है जो शायद देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के इस गांव में फिट बैठता है। देश के सबसे बड़े सूबे में स्थित आगरा जिले के एक ब्लॉक के गांव छह पोखर में, आज भी लोग एक अदद मुठ्ठी भर जमीन के लिए तरस रहे हैं। यहां पर लोगों के घर ही क्रबिस्तान में तब्दील हो गए हैं। सुनकर अचरज में पड़ गए होंगे, लेकिन धैर्य रखकर यकीन मानिए ये बात सच हैं।

'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, आगरा के छह पोखर गांव में आज भी लोग अपने परिवार के मृतकों को दफनाने के लिए तरस रहे हैं। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' जीतने की बात कर रहे हैं तो वहीं आज भी इस गांव के लोगों के घर की रसोई, कब्रिस्तान में बदल गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, गांव में कब्रिस्तान न होने के कारण लोग अपने मृत परिजनों को घर में ही दफनाने को बेबस हैं। गांव की एक महिला के मुताबिक उसके घर में ही उसके दादी को दफन किया गया है। जबकि कुछ घर तो ऐसे भी इस गांव में मिले जहां पर रसोई में ही उनके मृतक परिजनों को दफनाया गया है। गांव की एक महिला के अनुसार जहां पर वो खाना बनाती है, वहीं पर उनके बच्चों की भी कब्र है और उनके घर के पीछे ही परिवार के बुजुर्ग भी दफन किए गए हैं।

रिपोर्ट की मानें तो एक महिला ने कहा कि उसके घर के पीछे 5 लोगों को दफन किया गया है। जिसमें उसका 10 महीने का बेटा भी शामिल है। महिला ने कहा कि उसके बच्चे की मौत इलाज न हो पाने के कारण हुई थी। गांव की दूसरी महिला ने कहा कि सम्मान से जीना तो दूर, यहां पर वे गरीब लोग इज्जत से मरते भी नहीं हैं।

रिपोर्ट के अनुसार गांव में ज्यादातर मुस्लिम परिवार आज भी गरीब और भूमिहीन हैं। इन परिवारों के पुरुष ठेके पर मजदूरी करके अपने परिवार का जीवनयापन करते हैं। गांव वालों की माने तो उनकी मांगें को प्रशासन बार- बार ठुकरा रहा है। प्रशासन की उदासीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ वक्त पहले जो जगह कब्रिस्तान के लिए मुहैया कराई गई थी, वह भी एक तालाब के मध्य में पड़ती है। गांववालों के बार- बार कहने पर भी प्रशासन नींद से अभी तक जागा नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों की तरफ से सिर्फ आशवासन का सिलसिला का कायम है। जबकि गांव के एक व्यक्ति ने कहा, ' हम तो आज भी मुर्दों के साथ जीने को मजबूर हैं।' परेशान ग्रामीणों ने नजदीक के गांव सनन और अछनेरा कस्बे के कब्रिस्तानों में अपनों को दफानाने का प्रयास किया लेकिन वहां के लोग अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हुए।

ग्राम प्रधान के मुताबिक उन्होंने कई बार इस सिलसिले में अधिकारियों से बात की और मुस्लिम परिवारों के लिए कब्रिस्तान की जमीन दिलवाने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन मौन बना रहा। वहीं जिले के कलेक्टर रविकुमार एनजी की मानें तो उन्हें इस बात की कोई भी जानकारी अभी तक नहीं है। उन्होंने कहा कि अब ये बात उनके संज्ञान में आई है, तो इसलिए वह अधिकारियों की एक टीम भेजकर गांव में जरूरी कब्रिस्तान का ब्यौरा मंगवाएंगे।

Uttar Pradesh, India