लखनऊ में रिहाई मंच कार्यालय पर एनएपीएम, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), एआईपीएफ, रिहाई मंच, वर्कर्स काउंसिल, नागरिक परिषद, जमीयतुल क़ुरैश ने बैठक कर कहा की अनुच्छेद 370 व 35A भारत सरकार के कश्मीर के राजा रहे हरी सिंह के साथ समझौते का परिणाम है। इसको खत्म करना कश्मीर के लोगों के साथ विश्वासघात है। इसलिए भी क्योंकि कश्मीर के लोगो की भावनाएं इसके साथ जुड़ी हुई हैं। बिना कश्मीर के लोगों, संगठनों और राजनीतिक दलों को विश्वास में लिए बिना यह निर्णय कश्मीर पर थोपना वहां के लोगों में और अलगाव पैदा करेगा। यह स्थिति कश्मीर और भारत दोनों के लिए ही सही नहीं है। जबकि देश के दूसरे हिस्सों में जनता की मांग पर छोटे राज्यों का निर्माण और केंद्र शासित प्रदेशों को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की दिशा में प्रगति हुई है। जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करना लोकतांत्रिक सत्ता के विकेंद्रीकरण की विरोधी प्रक्रिया है। इसके साथ ही भारत सरकार ने अब लगता है ऐसा मान लिया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से उसका कोई मतलब नहीं है।

बैठक में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के मैगेसैसे पुरस्कार सम्मानित प्रो. संदीप पाण्डेय, रिहाई मंच अध्यक्ष एडवोकेट मुहम्मद शुऐब, एएमयू छात्रनेता मुजतबा फ़राज़, वर्कर्स काउंसिल के ओपी सिन्हा, नागरिक परिषद के रामकृष्ण, रिहाई मंच के डा. एमडी खान, राजीव यादव, शकील कुरैशी, रॉबिन वर्मा, इमरान अंसारी, मुन्ना यादव, मुस्तकीम शामिल रहे।