एक देश एक भाषा के बयान से पलटे अमित शाह

एक देश एक भाषा के बयान से पलटे अमित शाह

कहा, मैंने क्षेत्रीय भाषाओं पर हिंदी थोपने की बात कभी नहीं कही

नई दिल्ली: गृह मंत्री अमित शाह के एक राष्ट्र-एक भाषा के फॉर्मूले का दक्षिण भारतीय राज्यों में विरोध जारी है। इस बीच शाह ने अपने बयान पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मेरे बयान का मतलब किसी की मातृभाषा पर हिंदी को थोपना नहीं था। अगर कोई इस मसले पर राजनीति करना चाहता है, तो ये उसकी इच्छा है। गृह मंत्री ने कहा, 'मैंने हिंदी को क्षेत्रीय भाषाओं पर थोपने की बात कभी नहीं कही और कि मातृभाषा के अलावा हिंदी को वैकल्पिक भाषा के रूप में सीखने की सिर्फ अपील की। मैं खुद एक गैर-भाषी राज्य गुजरात से आता हूं। अगर कुछ लोग राजनीति करना चाहते हैं तो ये उनकी इच्छा है।

इससे पहले सुपर स्टार रजनीकांत ने कहा कि तमिलनाडु ही नहीं किसी भी दक्षिण राज्य में जबरन हिंदी या कोई अन्य भाषा नहीं थोपी जानी चाहिए। रजनीकांत ने कहा- केवल भारत ही नहीं बल्कि किसी भी देश के लिए एक भाषा होना इसकी एकता और प्रगति के लिए अच्छा है। लेकिन, हमारे देश में जबरन कोई भी भाषा लागू नहीं की जा सकती है।

इससे पहले कमल हासन ने भी कहा था कि 1950 में देशवासियों से वादा किया गया था कि उनकी भाषा और संस्कृति की रक्षा की जाएगी। कोई शाह, सम्राट या सुल्तान इस वादे को अचानक से खत्म नहीं कर सकता। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा था कि भाषा को लेकर एक और आंदोलन होगा, जो तमिलनाडु में जल्लीकट्टू विरोध प्रदर्शन की तुलना में बहुत बड़ा होगा। हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन तमिल हमेशा हमारी मातृभाषा रहेगी।

अमित शाह ने 14 सितंबर को कहा था कि हिंदी हमारी राजभाषा है। हमारे देश में कई भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन एक ऐसी भाषा होनी चाहिए जो दुनियाभर में देश की पहचान को आगे बढ़ाए और हिंदी में ये सभी खूबियां हैं। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और बंगाल के नेता पहले ही इस पर विरोध जता चुके हैं।