देश में तानाशाही शासन जैसी व्‍यवस्‍था बनती जा रही है: राहुल गाँधी

देश में तानाशाही शासन जैसी व्‍यवस्‍था बनती जा रही है: राहुल गाँधी

तिरुवनंतपुरम : कांग्रेस नेता राहुल गांधी केरल में अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड के दौरे पर हैं, जहां उन्‍होंने अर्थव्‍यवस्‍था, बेरोजगारी सहित कई मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार पर हमला बोला। उन्‍होंने 'मॉब लिंचिंग' पर प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र लिखने वाले 49 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि देश में तानाशाही शासन जैसी व्‍यवस्‍था बनती जा रही है।

राहुल गांधी केरल में बांदीपुर टाइगर रिजर्व से होते हुए गुजरने वाले राष्‍ट्रीय राजमार्ग 766 पर रात के समय ट्रैफिक प्रतिबंधित किए जाने के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे युवाओं के साथ एकजुटता प्रदर्श‍ित करने के लिए यहां पहुंचे। उन्‍होंने एक ट्वीट में यह भी कहा कि कई लोगों को लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहने के कारण अस्‍पताल में भर्ती भी कराना पड़ा। प्रदर्शनकारियों की भूख हड़ताल का शुक्रवार को 10वां दिन है।

इस मौके पर राहुल गांधी ने अर्थव्‍यवस्‍था और बेरोजगारी के मुद्दे पर भी बात की और इसे लेकर मोदी सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा किया। उन्‍होंने कहा, 'भारत की सबसे बड़ी ताकत इसकी अर्थव्‍यवस्‍था रही है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी ने बर्बाद कर दिया है। उन्‍हें बताना चाहिए कि उन्‍होंने ऐसा क्‍यों किया और देश में बेरोजगारी का संकट क्‍यों पैदा किया? प्रधानमंत्री को इस पर चर्चा करनी चाहिए।'

मॉब लिंचिंग पर प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र लिखने वाली विभिन्‍न क्षेत्रों की 49 हस्तियों के खिलाफ एफआई दर्ज किए जाने पर कांग्रेस नेता ने कहा कि आज जो भी प्रधानमंत्री मोदी या उनकी सरकार की आलोचना करता है, उसे जेल में डाल दिया जाता है। उन्‍होंने कहा, 'हर कोई जानता है कि इस देश में क्‍या हो रहा है। देश में ऐसी व्‍यवस्‍था बनती जा रही है, जिसमें किसी एक ही व्‍यक्ति का राज होता है। प्रधानमंत्री के खिलाफ जो कोई भी कुछ बोलता है, उसे जेल में डाल दिया जाता है। मीडिया को बुरी तरह दबाया जा रहा है और अब यह कोई छिपी बात नहीं रह गई है।'

अपने संसदीय क्षेत्र में टाइगर रिजर्व क्षेत्र से यातायात को प्रतिबंधित किए जाने का विरोध करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के कई वन क्षेत्रों में ट्रैफिक मार्ग हैं और इसलिए केवल वायनाड में इस तरह के प्रतिबंध की बात समझ नहीं आती है। उन्‍होंने यह भी कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्‍होंने प्रतिबंध के खिलाफ कानूनी विकल्‍प तलाशने की बात भी कही।