सहारनपुर में क्या इमरान मसूद की साज़िश का शिकार हुए नोमान?

सहारनपुर में क्या इमरान मसूद की साज़िश का शिकार हुए नोमान?

लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी

राज्य मुख्यालय लखनऊ।दो राज्यों और यूपी में हुए उपचुनावों से एक बात तो साफ़ हो गई कि साम्प्रदायिकता को हथियार बनाकर चुनाव लड़ने वालों को जनता ने आईना दिखाया है कि सिर्फ़ हिन्दू-मुसलमान व पाकिस्तान करने से काम नहीं चलेगा ज़मीन पर काम करना होगा।हालाँकि मोदी की भाजपा दोनों प्रदेशों में और यूपी के उपचुनावों में ज़्यादा सीटें हासिल करने में कामयाब रही ये भी एक सच्चाई है लेकिन इस सच्चाई में एक संदेश भी छिपा है जिसे राजनीतिक जानकार समझ रहे।जिस तरह के सर्वे दिखाएं जा रहे थे कि मोदी की भाजपा बहुत बड़े पैमाने पर जीत दर्ज कर विपक्ष को बेजान बनाने जा रही है ऐसा नहीं हुआ है जनता ने मोदी की भाजपा को सरकार बनाने का अवसर तो दिया लेकिन बहुत खिंच तान के हरियाणा में तो निर्दलियों गोपाल कांडा जैसों तक डोरे डालने पर मजबूर किया फ़ज़ीहत होने पर क़दम पीछे करने के लिए मजबूर होना पड़ा फिर भी करना पड़ा समझौता ही भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल काट रहे अजय चौटाला को जेल से बाहर भेजना पड़ा और दुष्यंत चौटाला को उप मुख्यमंत्री के पद से नवाज़ना पड़ा और महाराष्ट्र में शिवसेना को साथ लेकर चलने को विवश किया।हालाँकि शिवसेना अभी भी मोदी की भाजपा के ख़िलाफ़ बोल रही है लेकिन फिर भी सरकार बन ही जाएगी ऐसा माना जा रहा है।

यूपी की जिन सीटों पर उपचुनाव हुए उनमें सात मोदी की भाजपा और तीन सीटें सपा को मिली है जिसमें एक सीट उसकी ही थी दो सीट उसने अलग-अलग दलों से छिनी है एक मोदी की भाजपा से और एक बसपा से छिनने में सपा कामयाब रही है जबकि बसपा और कांग्रेस का प्रदर्शन काफ़ी निराशाजनक रहा है।अगर वोट प्रतिशत की वृद्धि के बारे में बात की जाए तो मोदी की भाजपा के वोटबैंक में 14% की गिरावट दर्ज की गई है और सपा के वोटबैंक में 4% का उछाल आया है और कांग्रेस के वोटबैंक में भी 7% का उछाल आया है बसपा के वोटबैंक में न कमी और न बढ़ोतरी हुई है वो अपनी जगह खड़ी दिखाई दी है।एक और बात साफ़ हुई है यूपी में सपा एकला चलो के फ़ार्मूले पर चलकर ही कुछ कर सकती हैं ये बात उपचुनाव की तीन सीटें जीतने और एक सीट वह मामूली अंतर से हार गई।जबकि कांग्रेस सहारनपुर की गंगोह सीट पर नंबर दो रही वहाँ पर कांग्रेस के ठेकेदार इमरान मसूद का कहना है कि प्रशासन ने जबरन हराया है जहां तक उनके आरोप की बात है उसमें कोई जान नहीं है काजी परिवार 2012 से लगातार हारता चला आ रहा है मुसलमानों को गुमराह करने के लिए यह परिवार ऐसी बात कर रहा है जिससे मुसलमान किसी अन्य व्यक्ति पर विचार न करें।सहारनपुर नगर निगम के चुनाव में बसपा के प्रत्याशी रहे हाजी फजलूर्रहमान मोदी की भाजपा से लगभग 1900 वोटों से हार गए थे इसके बाद वह लोकसभा के चुनाव में बसपा के प्रत्याशी बनाए गए थे और जीते भी थे लेकिन इमरान मसूद चुनाव के दौरान प्रचार करते हुए कहते थे कि वह क्या चुनाव लड़ेंगे जो मेयर की कुर्सी जीती हुई हार आए थे उनकी अपनी फ़ैक्ट्री बचानी थी अब सवाल उठ रहा है कि हाजी फजलूर्रहमान की तो फ़ैक्ट्री थी उसे बचाने के लिए जीती हुई सीट हार गए थे लेकिन इमरान मसूद तो अपने आपको सहारनपुर का सिकंदर समझते हैं फिर वो क्यों जीती हुई गंगोह विधानसभा सीट हार गए इसका जवाब नहीं दे पा रहे हैं ।जबकि सच्चाई तब भी अलग थी और आज भी अलग है इस परिवार के सदस्य इमरान मसूद के नाम पर हिन्दू वोट नहीं मिलता जिसकी वजह से मसूद परिवार मुसलमान के वोट तक ही सीमित रह जाता है इस बार हिन्दू वोट ने सपा के चौधरी इन्द्रसेन को चालीस हज़ार से अधिक वोट दे दिए पन्द्रह हज़ार के लगभग मुसलमान का वोट सपा को मिल गया जिसकी वजह से नोमान मसूद चालीस हज़ार से ज़्यादा मतों से पराजित होने से रह गए और मात्र पाँच हज़ार से ही हार पाए।जिस हार की चुनाव से पूर्व ही कल्पना की जा रही थी उस हार पर इमरान मसूद ये कहना कि हमें जबरन हरा दिया है किसी के गले नहीं उतर रहा है असलियत सामने से आ रही है कि नोमान मसूद बसपा से चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जा रहे थे और बसपा से नोमान मसूद जीत भी जाते इसमें कोई शक नहीं है लेकिन इमरान मसूद ये नहीं चाहते कि परिवार का कोई अन्य सदस्य या ग़ैर परिवार का कोई सदस्य चुनाव जीते इसी लिए वह इस तरह की सियासत करते हैं कि चुनाव भी लड़े और हार भी हो बस वही हुआ और कुछ नहीं सहारनपुर की सियासत में ये ऐसा व्यक्ति बन गया है जो ख़ुद जीतेगा नहीं और किसी को जीतने भी नहीं देगा सहारनपुर की जनता को अपनी सियासी ज़मीन इमरान मसूद से अलग बनानी होगी तभी सहारनपुर की अवाम को मोदी की भाजपा पर जीत हासिल करने में कामयाबी मिल सकती है नहीं तो नंबर दो पर रहने का चुनाव लड़ते रहोगे यही सच है।लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद के ढोंग में वहाँ का मुसलमान फँसा नहीं इस लिए हाजी फजलूर्रहमान सांसद बन गए जब-जब उसके फेर में फँसा तब-तब वहाँ के सेकुलर वोट की हार हुई।सहारनपुर की सियासत में सियासी रूप से ठगता रहेगा इमरान मसूद इससे बचने का रास्ता तलाश करना होगा।मुसलमान और सेकुलर हिन्दू मिलकर इसपर विचार कर रहे हैं।चुनाव में हार ही हार को सहन करते हुए सहारनपुर की अवाम थक गई है इसी लिए इमरान मसूद ने जबरन हराने का ढोंग किया है।यह इमरान मसूद की लगातार पाँचवीं हार है।