अलका लांबा को मिल सकती है दिल्ली कांग्रेस की कमान

अलका लांबा को मिल सकती है दिल्ली कांग्रेस की कमान

नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अब अपनी टीम में बदलाव पर विचार कर रही है. सूत्रों का कहना है कि पार्टी जल्द ही दिल्ली कांग्रेस के अपने नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर सकती है जिसमें अलका लांबा का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा है.

गौरतलब है कि दिल्ली की हाईप्रोफाइल सीट चांदनी चौक से कांग्रेस उम्मीदवार अलका लांबा को हाल ही में हुए चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. उनके सामने चुनावी मैदान में उतरे चांदनी चौक से आप उम्मीदवार प्रहलाद साहनी ने जीत दर्ज की. माना जा रहा है कि चांदनी चौक में इस बार बीजेपी और आप की कड़ी टक्कर की वजह से अलका लांबा के लिए मुकाबला मुश्किल हो गया था.

हालांकि साल 2015 के विधानसभा चुनाव में अलका लांबा चांदनी चौक से चुनाव जीती थीं लेकिन उस वक्त वो आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार थीं. लेकिन इस बार घर वापसी करते हुए कांग्रेस के टिकट पर चांदनी चौक से दोबारा चुनाव लड़ना उन्हें जीत नहीं दिला सका. स्थानीय वोटरों ने अलका को स्थानीय मुद्दों पर खारिज़ कर दिया.

अलका लांबा ने राजनीतिक करियर की शुरुआत छात्र नेता के तौर पर की. 1994 में वो एनएसयूआई से जुड़ी और ऑल इंडिया गर्ल कन्वेनर के रूप में काम किया. एक साल बाद ही 1995 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव जीता. इसके बाद 1997 में अलका एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं. साल 2002 में अलका लांबा को राजनीति का बड़ा ब्रेक मिला. उन्हें अखिल भारतीय महिला कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया गया. इसके बाद साल 2006 में वो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का हिस्सा बनीं और उन्हें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव नियुक्त किया गया. 2007 में उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का भी सचिव बनने का मौका मिला.

लेकिन साल 2013 में दिल्ली में आई 'आप' की आंधी को देखकर अलका लांबा ने राजनीति की राह बदलने का फैसला किया. उन्होंने कांग्रेस का हाथ झटक कर 'आप' की झाड़ू थाम ली. 2015 में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें चांदनी चौक से आम आदमी पार्टी ने टिकट दिया. अलका लांबा चांदनी चौक से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बनीं. हालांकि साल 2003 में अलका लांबा को मोती नगर से कांग्रेस ने टिकट दिया था. लेकिन उन्हें बीजेपी के कद्दावर नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.