कोरोना वैक्सीन पर क़ब्ज़ा चाहता था अमेरिका

कोरोना वैक्सीन पर क़ब्ज़ा चाहता था अमेरिका

जर्मन कंपनी से विशेषाधिकार खरीदने की कोशिश की थी

बर्लिन: चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है। अमेरिका भी इससे अछूता नहीं है, जहां इस वायरस के चलते 69 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 3,700 से अधिक लोग संक्रमित हैं। अमेरिका में कोरोना के बढ़ते संक्रमण पर लगाम के लिए ट्रंप प्रशासन हरसंभव तैयारी में जुटा हुआ है। इस बीच खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक जर्मन मेडिकल कंपनी से कथित तौर पर कोरोना वायरस की वैक्सीन का विशेषाधिकार खरीदने की कोशिश की थी।

ट्रंप प्रशासन ने इस वैक्सीन के लिए मेडिकल कंपनी को 'मोटी रकम' की पेशकश की थी। हालांकि, इस खुलासे के बाद जर्मन सरकार ने नाराजगी जताई है। जर्मन मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्युबिंगन-आधारित बायोफार्मास्युटिकल कंपनी क्योरवैक को कोरोना की वैक्सीन का विशेषाधिकार पाने के लिए 'बड़ी रकम' देने की पेशकश की थी। ये वही मेडिकल कंपनी है जो कोरोना की वैक्सीन बनाने में अग्रणी मानी जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प केवल अमेरिका के लिए कोरोनोवायरस की वैक्सीन का अधिकार हासिल करना चाहते हैं। दूसरी ओर जर्मनी की सरकार अपने देश के लोगों के लिए इस वैक्सीन के वित्तीय प्रोत्साहन की पेशकश की है। जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेन्स स्पैन ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन ने क्योरवैक कंपनी से वैक्सीन का अधिकार पाने के लिए अलग से डील की थी।

जेन्स स्पैन ने कहा, क्योरवैक कंपनी की तैयार वैक्सीन 'पूरी दुनिया के लिए' होगा, न कि किसी व्यक्तिगत देश के लिए होगा। जर्मनी के विदेश मंत्री ने कहा, जर्मन शोधकर्ता दवाई और वैक्सीन विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। हम ये नहीं चाहेंगे कोई उनकी खोज को सिर्फ अपने लिए इस्तेमाल करे।